पोल टॉक नेटवर्क । लखनऊ
यूपी में हुए वर्ष 2024 (Rajya Sabha Chunav 2026) के राज्यसभा चुनाव ने बड़ी महाभारत कराया है। उत्तर प्रदेश में अभी विधानसभा चुनाव होने में दो साल का समय है लेकिन सियासत तेज है। समाजवादी पार्टी ने खुलकर खेलना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अभी तक चार बागी विधायकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। समाजवादी पार्टी ने अपने चार बागी विधायकों को पार्टी से बाहर किया है। उसके बाद से ही सवाल उठ रहे हैं कि जिस आधार पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन विधायकों को पार्टी से निकाला है। अब फिर वर्ष 2026 में राज्यसभा (Rajya Sabha Chunav 2026) के चुनाव होने हैं। कुल 10 सीटों पर चुनाव होंगे। जिसमें समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव का कार्यकाल वर्ष 2026 में पूरा हो रहा है। वर्ष 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी को कुल 111 सीटों पर जीत मिली थी। अब सपा के पास कुल 107 विधायक की संख्या रह गई है। सवाल यही है कि राज्यसभा के चुनाव में कैसे समाजवादी पार्टी भाजपा को टक्कर दे पाएगी।
इन सदस्यों को किया बाहर ?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऊंचाहार से सपा के विधायक मनोज पांडेय, गोसाईगंज से सपा विधायक अभय सिंह, गौरीगंज से सपा विधायक राकेश कुमार सिंह और चायल से सपा की विधायक पूजा पाल को पार्टी से बाहर कर दिया है। इन सभी पर आरोप है कि इन विधायकों ने पार्टी लाइन से बाहर जाकर काम किया है। सूत्र बता रहे हैं कि अंदरखाने यह चल रहा है कि वर्ष 2024 में राज्यसभा के चुनाव में इन विधायकों ने सपा के प्रत्याशी को मत नहीं दिया था। इसलिए ऐसा हुआ है।
इन राज्यसभा सस्दयों का कार्यकाल होगा पूरा ?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा के सदस्यों की संख्या कुल 31 है। जिनमें से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का 25 नवंबर 2026, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह 25 नवंबर 2026, पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा का 25 नवंबर 2026, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा 25 नवंबर 2026, पूर्व डीजीपी बृज लाल का 25 नवंबर 2026, पूर्व पीएम चंद्रशेखर सिंह के बेटे नीरज शेखर का 25 नवंबर 2026, सीमा द्विवेदी का 25 नवंबर 2026, गीता शाक्य का 25 नवंबर 2026, समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव का 25 नवंबर 2026 और बसपा के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम का 25 नवंबर 2026 को कार्यकाल पूरा होगा।
अब निलंबित विधायकों ने संभाला मोर्चा
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायकों ने अब मोर्चा संभाल लिया है। खुलकर अखिलेश यादव के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया है। जिसे लेकर सियासत गरमा गई है। इसका पूरा असर आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में दिखेगा। समाजवादी पार्टी इस बार सत्ता में वापसी का सपना देख रही है। लेकिन यदि पार्टी में ऐसी गुटबाज़ी और असंतोष गहराता रहा, तो चुनावी रणनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है। अखिलेश यादव पर सीधा निशाना लगाया जा रहा है। निष्कासित विधायकों ने अखिलेश यादव की नेतृत्व शैली को “तानाशाही” करार दिया है। एक पूर्व विधायक ने कहा कि पार्टी अब नेताजी (मुलायम सिंह यादव) की विचारधारा से भटक चुकी है। अब यहां सिर्फ चापलूसी चलती है, कार्यकर्ता और जमीनी नेता की कोई सुनवाई नहीं।
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