पोलटॉक नेटवर्क। जयपुर
राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान सरकारी स्वास्थ्य योजना (RGHS घोटाला) अब एक बड़े घोटाले के कारण सुर्खियों में है। करीब 880 करोड़ रुपये की धांधली का खुलासा हुआ है, जिसमें विभागीय अधिकारियों द्वारा हेराफेरी कर लाखों फर्जी भुगतान किए गए हैं। इसके साथ ही, 3 लाख से ज्यादा मेडिकल बिल पोर्टल से गायब पाए गए हैं। आरजीएचएस दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष विवेक विजयवर्गीय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस ने कहा कि हम लोगों को बड़ा नुकसान हुआ है। सरकार इसपर जल्द ध्यान दें। नहीं तो हम सड़कों पर उतरेंगे और आंदोलन करेंगे। आरजीएचएस दवा विक्रेता संघ के उपाध्यक्ष सचिन गोयल, सचिव रवि गुप्ता ने कहा अगर हमारी मांगें नहीं मांगी गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
क्या है RGHS योजना?
RGHS योजना (RGHS घोटाला) के तहत राज्य के सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी जाती है। यह योजना 2021 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को आसान और पारदर्शी बनाना था।
घोटाले की शुरुआत कैसे हुई?
2023 के अंत में कुछ हॉस्पिटल्स द्वारा संदिग्ध दावों की शिकायतें मिलने के बाद जांच शुरू की गई। प्रारंभिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कई अस्पतालों (RGHS घोटाला) ने झूठे मरीजों के नाम पर बिल बना कर भुगतान लिया, जबकि कुछ मामलों में असली मरीजों के इलाज के बिल ही पोर्टल से गायब कर दिए गए।
जांच में क्या निकला?
कुल घोटाले (RGHS घोटाला) की रकम: ₹880 करोड़ से अधिक गायब हुए बिल: 3 लाख। संदिग्ध अधिकारी: 20 से अधिक स्वास्थ्य विभाग व आईटी विभाग के कर्मचारी
कथित मिलीभगत। कुछ निजी अस्पतालों व मेडिकल सप्लायर्स के साथ गठजोड़ है।
क्या कार्रवाई हुई?
राज्य सरकार ने एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित की है। अब तक: 12 अधिकारियों को निलंबित किया गया है। 5 के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
8 निजी अस्पतालों का एम्पैनलमेंट रद्द किया गया है।
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जनता का विश्वास डगमगाया
सरकार की छवि और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। कर्मचारियों और पेंशनर्स में रोष है क्योंकि कई असली लाभार्थियों के दावे अब तक अटके हुए हैं।

