पोलटॉक नेटवर्क। देहरादून
पुष्कर सिंह धामी ( Pushkar Singh Dhami ) उत्तराखंड के 10वें मुख्यमंत्री हैं। उनका जन्मदिन 16 सितंबर को होता है। पुष्कर सिंह धामी ने लखनऊ विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति में कदम रखा था। उसके बाद एबीवीपी में विभिन्न पदों पर रहे। लखनऊ में एबीवीपी के राष्ट्रीय अधिवेशन के संयोजक होने की उपलब्धि उनके खाते में दर्ज है। पुष्कर सिंह धामी एबीवीपी के यूपी प्रदेश महासचिव भी रहे हैं।
पुष्कर सिंह धामी ( Pushkar Singh Dhami ) ने यहां पर अपना बड़ा प्रभाव बनाया। लेकिन 2000 में उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद वह सीएम भगत सिंह कोश्यरी के ओएसडी भी रहे। 2002 से 2008 तक दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे।
युवा और बड़ा काम !
पुष्कर सिंह धामी जब उत्तराखंड के सीएम बने तब उस समय के सबसे युवा सीएम थे। लेकिन उनके काम ने उन्हें बड़ा बना दिया है। अब उनके काम की चर्चा पूरे देश में हो रही है। देश में जब भी किसी सरल और गंभीर सीएम के तौर पर नाम आता है तो उसमें सबसे पहले पुष्कर सिंह धामी का नाम आता है। उनके काम की चर्चा है। कानून व्यवस्था में लव जिहाद, धर्मांतरण, UCC पर काम करने वाले पहले सीएम।
विकास के लिए केदारनाथ पुनर्निर्माण, टनकपुर-बागेश्वर रेल प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। डिजिटल गवर्नेंस में पेपर लीक रोकने, ऑनलाइन भर्ती सिस्टम पर मजबूत काम किया है। हिंदुत्व नीति में हरिद्वार, चारधाम, सनातन संस्कृति को बढ़ावा के लिए काम किया जा रहा है।
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देशभक्ति और अनुशासन
उत्तराखंड के चंपावत में 16 सितंबर 1975 को टनकपुर में जन्म हुआ। उनके पिता सेना से रिटायर्ड हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नानकोत्तर, मानव संसाधन प्रबंधन और औद्योगिक संबंध (MHRM & IR) स्नातक (BA),वकालत (LLB), डीपीए (डिप्लोमा इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन) में पढ़ाई की है । देशभक्ति और अनुशासन उनके अंदर है।
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राजनीति में एंट्री ?
ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) से छात्र राजनीति में कदम रखा। छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहे, युवाओं के मुद्दों पर लड़ते रहे। 2002 से 2008 तक उत्तराखंड राज्य युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे। युवाओं के लिए “रोज़गार बोर्ड” की मांग की, जो आज भी चर्चा में रहता है। उसके बाद 2012 में पहली बार खटीमा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।
3 जुलाई 2021 को बीजेपी हाईकमान ने पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाया और मात्र 46 साल की उम्र में अब तक के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। लेकिन 2022 विधानसभा चुनाव में खटीमा सीट से हार गए। चंपावत से उपचुनाव लड़ा और रिकॉर्ड मतों से जीते और दोबारा मुख्यमंत्री बने।

