संतोष कुमार पांडेय। जयपुर
राजस्थान में भील प्रदेश ( Bhil pradesh ) की मांग तेज हो गई है। जिसके लिए भारतीय आदिवासी पार्टी ने पूरी तैयारी कर रखी है। इसके लिए पूरी योजना बनाई है। भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक और राजस्थान विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक थावरचंद मीणा ( thavar chand meena ) ने पोलटॉक के एडिटर संतोष कुमार पाण्डेय से बातचीत में कई अन्य सवालों का भी जवाब दिया है। उन्होंने यह भी बताया है कि भील प्रदेश की जरूरत क्यों पड़ी है। पढ़िए ये ख़ास इंटरव्यू।
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सवाल : भील प्रदेश की क्यों जरूरत पड़ी है ? क्यों बाप मांग कर रही है ?
जवाब : देखिये, भील प्रदेश (Bhil Pradesh) की मांग सिर्फ बाप ही नहीं कर रही। बल्कि, उस क्षेत्र के सामाजिक संगठन और आदिवासी लोग कर रहे हैं। ये कोई नई मांग नहीं है। ये हमारे पुरखे करते आये हैं। अंग्रेजों के समय में 17 नवंबर 1913 को गुरु गोविंद महाराज के नेतृत्व में मांनगढ़ में मांग हुई थी। जिसमें 1500 से अधिक भीलों की हत्या हुई थी।
उस समय आदिवासियों की बातें नहीं सुनी जाती थी। भक्ति मार्ग के माध्यम से आदिवासियों ने अपनी मांग जारी रखी थी। भीलों को चार राज्य में बाँट दिया गया। जबकि, हमारी सबकुछ एक जैसी है। हमारे सांसद राजकुमार रोत ने एक नक्शा जारी किया था। उसके पीछे की मंशा साफ़ है।
सवाल : अन्य दल में राजनीति कर रहे आदिवासी नेताओं ने इस मांग को क्यों नहीं उठाया ?
जवाब : ऐसा नहीं है। अन्य दल में राजनीति में आदिवासी नेताओं ने भी इसकी मांग की है। भाजपा, कांग्रेस में रहने वाले कई नेताओं मांग उठाई थी। जैसे भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री नन्दलाल मीणा ने भी अलग प्रदेश की मांग उठाई थी। उन्होंने कहा था कि मैं किसी सरकार का गिरवी नहीं हूँ। मुझे अलग प्रदेश चाहिए। पूर्व संसद अर्जुन लाल मीणा ने भी अलग प्रदेश की मांग की थी। हमारी बोली और भाषा का संरक्षण बेहद जरूरी है। हमारी जाती के विकास के लिए जो धन आता है वो सही प्रयोग में नहीं लिया गया।
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सवाल : क्या चारों राज्यों के लोगों ने बाप से मुलाकात की है ? प्रदेश की मांग कर रहे लोगों ने क्या कहा ?
जवाब : देखिये, कुछ लोग जाति के नाम पर टिकट लेकर जीत जाते हैं। उसके बाद समाज और जाति के लिए कुछ नहीं करते। समाज को भूल जाते हैं। लेकिन, बाप पार्टी अपने समाज के लिए सबकुछ करेगी। आजादी के बाद कई राज्य बने तो भील प्रदेश क्यों नहीं बन सकता।
सवाल : क्या है भील प्रदेश का ब्लूप्रिंट ?
जवाब : जी हाँ। चार राज्यों के 50 जिले शामिल है। मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के 50 जिले इसमें शामिल होंगे। इसके लिए पूरी तैयारी की जा रही है। यह मांग हमेशा उठेगी। जबतक हमारा विकास नहीं होगा। सभी दलों को यह बात सोचनी होगी। भील प्रदेश (Bhil Pradesh) बनने से हमारा विकास होगा। प्रदेश बनने से हमारा पैसा जो आएगा वो पूरा विकास में लगेगा। भाजपा अगर वास्तव में भीलों का वास्तव में भला सोचती है तो उसे प्रदेश बना देना चाहिए।
चूंकि, चारों राज्यों में और केंद्र में भाजपा की सरकार है। इसलिए उन्हें अब लागू कर देना चाहिए।नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा। इसके लिए भारतीय आदिवासी पार्टी और यहां के सामाजिक संगठन मजबूती से तैयारी कर रहे हैं।

